श्री गणेश गायत्री मंत्र | एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् |

हिंदू धर्म में गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है मान्यता है कि गणेश भगवान सच्चे दिल से पूजा-अर्चना की जाए तो वे भक्तों के सारे दुख-दर्द और विघ्न दूर कर देते  है।  सनातन धर्म में हर कार्य को करने से पहले श्री गणेश का पूजन किया जाता है।  एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् - गणेश गायत्री मंत्र का शांत मन से लगातार 11 दिन तक 108 बार जप करने से गणेशजी की विशिष्ट कृपा होती है। गणेश जी के मंत्रों का जाप कर लोग सिद्धिया प्राप्त करते  है। 

श्री गणेश गायत्री मंत्र, | एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् |
गणेश गायत्री मंत्र GANESH GAYATRI MANTRA HINDI LYRICS
 
गणेश गायत्री मंत्र :

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।
एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।

Ekadantaay Vidmahe, Vakratundaay Dheemahi, Tanno Danti Prachodayaat.
Mahaakaaranaay Vidmahe, Vakratundaay Dheemahe, Tanno Danti Prachodayaat.

अर्थ: हम उस एक दन्त भगवान गणेश की प्रार्थना करते हैं, जो सर्वव्यापी है। हम ध्यान और प्रार्थना करते है उस हाथी के आकार वाले भगवान से बुद्धि के लिए। हम, ज्ञान के साथ अपने दिमाग को रोशन करने के लिए एकल दन्त भगवान गणेश के सामने झुकते हैं।

गणेश गायत्री मंत्र जाप की विधि-
  • सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानदि करें। गणेश गायत्री मंत्र जाप करना चाहिए
  • गणेश गायत्री इस मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए
  • उन्हें सिंदूर, दूर्वा, गंध, अक्षत (चावल), सुगंधित फूल, जनेऊ, सुपारी, पान, फल, आदि चीजें अर्पित करें।
  • गणेश गायत्री मंत्र आर्थिक प्रगति व समृद्धि प्रदायक है। मंत्र के जप करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है।
तांत्रिक गणेश मंत्र-

ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, सिदि्ध पति। मेरे कर दूर क्लेश।।

गणेश कुबेर मंत्र

ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।

गणेश जी की पूजा जाप:

ओम गं गणपतये नमः

ओम एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्।
गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
ओम श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।
ओम वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा
ओम हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा

ॐ गं गणपतये नमो नमः मंत्र लिरिक्स:

🙏|| ॐ गन गणपतए नमो नमः ||🙏

श्री गणेश भजन
ॐ गन गणपतए नमो नमः
श्री सिद्धि विनायक नमो नमः
अष्टविनायक नमो नमः
🙏👏 गणपति बाप्पा मोरया 🙏👏

ॐ गन गणपतए नमो नमः
श्री सिद्धि विनायक नमो नमः
अष्टविनायक नमो नमः
🙏👏 गणपति बाप्पा मोरया 🙏👏

ॐ गन गणपतए नमो नमः
श्री सिद्धि विनायक नमो नमः
अष्टविनायक नमो नमः
🙏👏 गणपति बाप्पा मोरया 🙏👏

ॐ गन गणपतए नमो नमः
श्री सिद्धि विनायक नमो नमः
अष्टविनायक नमो नमः
🙏👏 गणपति बाप्पा मोरया 🙏👏

ॐ गन गणपतए नमो नमः
श्री सिद्धि विनायक नमो नमः
अष्टविनायक नमो नमः
🙏👏 गणपति बाप्पा मोरया 🙏👏

ॐ गन गणपतए नमो नमः
श्री सिद्धि विनायक नमो नमः
अष्टविनायक नमो नमः
🙏👏 गणपति बाप्पा मोरया 🙏👏
....


श्री गणेश के बारे में : श्री गणेश, जिन्हें भगवान गणेश के नाम से भी जाना जाता है, श्री शिव और पार्वती के पुत्र हैं। उन्हें गणों के स्वामी की उपाधि प्राप्त है, इसीलिए उन्हें गणेश कहा जाता है। उनकी विशिष्ट विशेषता हाथी का सिर है, जिसके कारण उन्हें गजानंद और गजानन जैसे अन्य नाम भी मिले।

भगवान गणेश को सभी शुभ प्रयासों में प्रारंभिक देवता के रूप में सम्मानित किया जाता है, जिससे उन्हें "प्रथम पूज्य" का नाम प्राप्त होता है। उनकी पूजा करने वाले धार्मिक समूह को गाणपत्य के नाम से जाना जाता है। श्री गणेश को विभिन्न नामों से जाना जाता है, जिनमें सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन शामिल हैं। उनकी पारंपरिक सवारी चूहा है।

गणेश का असली नाम क्या था?
भगवान गणेश का सिर या मस्तक   कटने से पहले उनका नाम विनायक था। लेकिन जब उन्होंने उसके सिर की जगह हाथी का सिर लगाया तो लोग उसे गजानन कहने लगे। बाद में जब वे गणों के नेता बने तो उन्हें गणपति और गणेश कहा जाने लगा।

गणेश जी का किसका अवतार है?
त्रेतायुग में महाबली सिंधु की क्रूरता से हमें बचाने के लिए भगवान ने मयूरेश्वर का रूप धारण किया था। यह दिव्य अवतार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को शुभ अभिजित मुहूर्त में हुआ। इस अवतार के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती की उपस्थिति में प्रकट हुए।

लक्ष्मी और गणेश जी का क्या रिश्ता है?
गणेश जी को पुत्र रूप में पाकर माता लक्ष्मी बहुत प्रसन्न हुईं। उन्होंने गणेश जी को वरदान दिया कि जो कोई भी उनके साथ उनकी पूजा नहीं करेगा, वह उनके साथ निवास नहीं करेंगी। यही कारण है कि देवी लक्ष्मी के साथ उनके 'दत्तक पुत्र' भगवान गणेश की हमेशा पूजा की जाती है।

गणेश जी के 11 मंत्र कौन कौन से हैं?
भगवान श्री गणेश बुद्धि के दाता और चिंताओं के निवारणकर्ता हैं। इनमें से किसी भी सरल मंत्र का केवल 21 बार या अपनी भक्ति में महत्व रखने वाली संख्या का जाप करने से भगवान गणेश प्रसन्न हो जाते हैं।

श्री गणेश के 11 अत्यंत सरल पौराणिक मंत्र
1. - श्री गणेशाय नम:
2. - ॐ श्री गणेशाय नम:
3. - गं गणपतये नम:
4. - ॐ गं गणपतये नम:
5. - ॐ गं ॐ गणाधिपतये नम: 
6. ॐ सिद्धि विनायकाय नम: 
7. ॐ गजाननाय नम. 
8. ॐ एकदंताय नमो नम: 
9. ॐ लंबोदराय नम: 
10 . ॐ वक्रतुंडाय नमो नम: 
11. ॐ गणाध्यक्षाय नमः

Searches Tag: गणेश गायत्री मंत्र का अर्थ, गणेश गायत्री मंत्र पीडीऍफ़, गणेश गायत्री मंत्र के लाभ, ॐ एकदंताय विद्महे Lyrics, ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि meaning, इच्छापूर्ति गणेश मंत्र, श्री गणेश वंदना मंत्र, श्री गणेश गायत्री मंत्र lyrics सभी देवताओं के गायत्री मंत्र.
Previous Post Next Post